Tuesday, 28 October 2014

Hadeesi hadse 18


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हदीसी हादसे 18

बुखारी १००१ 

"मुहम्मद का कहना है कि कुत्ते की तिजारत, भडुवा गीरी, और काहनों की बाटी हुई मिठाई खाना हराम है." 
* क़ुरानी फ़रमान में मुहम्मदी अल्लाह कहता है कि
 "लौंडियों की जिस्म फ़रोशी से मिलने वाले फ़ायदे हैं तो मना है, फिर भी इसके लिए अल्लाह मेहरबान मुआफ करने वाला है."? 
इस्लामी तज़ाद (विरोधाभास) का खुला द्वार। 
बुखारी अ००७ 

मुहम्मद ने कहा अल्लाह तअला जिसे अपना नबी मबऊस करता है, वह बकरियां को ज़रूर चराए हुए होता है. किसी ने पूछा क्या आप भी? कहा "हाँ मैं भी मक्का में चन्द दिरहम के एवज़  बकरियां चराइं ." 
*बकरियां चराने के दौरान मुहम्मद ने पैगम्बरी का ख्वाब भी देखा. मुराद पूरी होने पर दुन्या के बड़े हिस्से को किसी चरवाहे का इल्मे-जिहालत तकसीम किया जो दुन्या के लिए अजाब बना हुवा है. 

बुख्क्री १००८ 
मुहम्मद एक मिसाल पेश करते हैं कि 
" किसी ने एक काम पूरा करने के लिए कुछ लोगों को काम पर रखा मगर काम पूरा करने से पहले वह थक हार के अपनी उजरत मुआफ करते हुए चले गए. 
इसी तरह वह शख्स तीन बार मजदूरों को रखता है मगर हर बार मज़दूर हिम्मत हारके चले जाते हैं. चौथी बार उसने जिस गिरोह को सूरज डूबने से पहले काम पर लगता है, वह काम को पूरा कर देते हैं और पूरी उजरत लेकर चले जाते हैं. 
मुहम्मद इस्लाम कुबूल करने वालों को चौथा गिरोह मानते हैं." 

यह मिसाल अपने आप में मुसलमानों को क्या रुतबा देती है कि तीन मेहनत कशों का हक इन्हें मुफ्त मिल गया.? क्या इनका अल्लाह उस शख्स की तरह है जो तीन गिरोहों की उजरत घोटते को जायज़ समझे और चौथे को मुफ्त देदे? ये तो बहुत ही नामाकूल अल्लाह है. 
मुहम्मद का जेहनी मेयार कुछ यूँ ही था. 

बुखारी १०१० 
कुछ लोग सफ़र में थे कि रात हो गई, पास की बस्ती में रुक जाने का फैसला किया. बस्ती पहुँच कर बसती वालों से अपनी मेहमान दारी करने की फ़रमाइश की जिसे बस्ती वालों ने इनकार कर दिया. 
इत्तिफ़ाक से उस बस्ती के मुख्या को किसी ज़हरीले जानवर ने डंस लिया. वह लोग परेशान हो गए, कोई इलाज काम न आ रहा था. मश्विरह ये हुवा कि चलो बस्ती में टिके मुसाफिरों से दरयाफ्त किया जाए कि उनको शायद कोई मंतर मालूम हो. उनके पास जाकर माजरा बयान किया और पूछा कि आप लोगों के पास कोई मंतर है?
उनमें से एक बोला मंतर तो है मगर उसका मावज़ा अदा करना पड़ेगा क्योंकि तुम लोगों ने हमारी मेहमानी करने से इंकार कर दिया था. मुआमला बकरयो के एक रेवड़ पर तै हुवा. मुसाफिर में एक ने 'अल्हम्द' पढना और मुखिया पर दम करना शुरू कर दिया इत्तेफाक से वह मुखिया ठीक होने लगा और कुछ देर में एकदम ठीक हो गया,
 गोया उन लोगो को उन्हों ने बकरियों का एक रेवड़ दिया ज़िसको उन लोगों ने आपस में बाँटना चाहा कि उनमें से एक ने कहा चलो रसूल अल्लाह के पास मुआमले को बतलाएं फिर बाटें.
वह लोग मुहम्मद के पास आए और मुआमला बयान किया दिल चस्प वाकिए पर मुहम्मद हँसे और उन से पूंछा कि तुम को कैसे मालूम हुवा कि 'अल्हम्द' में मंतर छिपा है? कहा, खैर तुम लोग हिस्सा बाँट लो मगर उसमे मेरा हिस्द्सा भी लगेगा.

*दो बातें सामने आईं कि मुहम्मद अल्हम्द के मुसन्निफ़! हैरत में पड़ गए कि मेरी रचना मंतर का काम भी करती है?
दूसरे यह कि मुहम्मद की नियत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि जायज़ नाजायज़ मॉल हजम करने में कितने चाक चौबंद थे.

बुखारी १०११
`"मुहम्मद ने नर को मादा पर चढाने से और इसके बदले पैसा लेने से इंकार कर दिया."

*यह आम तौर पर पेशा हुवा करता था और आज भी है कि लोग नर को पाले रहते हैं कि ये नसले बढ़ने के काम आएगा और इसकी उजरत भी लेते है क्योंकि उन्हें पलने में कुछ लगत है. जायज़ पेशा हुवा.
मुहम्मद की पैगम्बरी अक्ल की पनाह चाहती है कि उजरत न लेते मगर कुदरत के मुआमले में अपनी जिहालत न भरते. अव्वल तो पैगम्बरी शान पर ये ज़ेबा ही नहीं देता कि नर पाले वह भी अन्डू. फिर इस नाज़ेब्गी को अवाम के काम न आने दें. अपनी इसी नज़रिए के चलते वह सांड पालने वालों पर भी बरहम हुवा करते थे और उनको जहन्नमी कहते थे.

बुखारी १०१२
मुहम्मद कहते हैं कि जब कोई तुमको किसी मालदार का हवाला दे तो चाहिए कि तुम उसके पीछे लग जाओ. उसका लाख हीला हवाला उसके काम न आने दो.

* यह मुहम्मद की नाकिस सोंच थी. एक तरफ़ तो उनका कोई मेहनत कशी का पैगाम नहीं है दूसरी तरफ़ मेहनत और हिकमत से मॉल कमाने वालों के पीछे मुफ्त खोर गुंडों को लगा दो?
लूट खसोट मुहम्मद के वजूद में शामिल है.


जीम. मोमिन 

Tuesday, 21 October 2014

Hadeesi hadse 17


हदीसी हादसे 17
बुखारी 649
उमर के बेटे अब्दुल्ला कहते हैं कि एक रोज़ मुहम्मद, उमर इब्ने सय्याद की तरफ चले. बनू मुगाला के पास इसको बच्चों में खेलता हुवा पाया जो बालिग होने के क़रीब हो चुका था. इसको मुहम्मद के आने की खबर न हुई, जब मुहम्मद ने इसे हाथ से थपका तो इसको पता चला. मुहम्मद ने कहा
"तू इस बात की गवाही देता है कि मैं अल्लाह का रसूल हूँ ?"
 इसने मुहम्मद की तरफ देख कर कहा कि
"हाँ! मैं इस बात की गवाही देता हूँ कि आप जाहिलों के रसूल हैं."
 इसके बाद वह कहने लगा कि
"क्या आप इस बात की गवाही देते हैं कि अल्लाह का रसूल हूँ?"
 मुहम्मद ने उसके सवाल पर कन्नी काटी और कहा,
"मैं अल्लाह के सभी बर हक रसूलों पर ईमान रखता हूँ."
 फिर मुहम्मद ने उससे दरयाफ्त किया
"तुझको क्या मालूम होता है?"
उसने कहा "मुझको झूटी और सच्ची दोनों तरह की ख़बरें मालूम होती हैं."
" मुहम्मद ने कहा तुझ पर मुआमला मखलूत हो गया है"
फिर कहा "मैं ने तुझ से पूछने के लिए एक बात पोशीदा रक्खी है?"
उसने कहा "वह दुख़ है."
मुहम्मद ने कहा "दूर हो तू अपने मर्तबे से हरगिज़ तजाउज़ नहीं कर सकेगा."
उमर ने कहा
"या रसूल लिल्लाह अगर इजाज़त हो तो मैं इसे क़त्ल कर दूं?"
मुहम्मद ने कहा "अगर ये वही दज्जाल है तो तुम इसके क़त्ल पर क़ादिर  नहीं हो सकते, और अगर ये दज्जाल नहीं तो इसको मारने से क्या हासिल?"
राहे-फ़रार के सिवा मुहम्मद को कोई राह न मिली.
इब्ने सय्याद का नाम एसाफ़ था.
*शाबाश " एसाफ़ " तू अपने वक़्त का हीरो था, जिसे मुहम्मद को उनकी हक़ीक़त  समझा दी.
तुझको मोमिन सलाम करता है.




जीम. मोमिन 

Tuesday, 14 October 2014

Hadeesi hadse 16


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बुखारी ६६५ 
मुहम्मद नमाज़ से फारिग होने के बाद लोगों से पूछा करते थे कि अगर उन्होंने कोई ख़्वाब देखा हो कि वह उसकी ताबीर बतला दें. रोज़ की उनकी बकवास सुनते सुनते लोग बेजार हो गए तो एक दिन ऐसा आया कि किसी ने कोई ख्वाब ही नहीं देखा. इस पर मुहम्मद ने कहा मैं ने एक ख़्वाब देखा सुनो - - - 
1-मैंने देखा कि एक मुक़द्दस ज़मीन की तरफ़ मुझे ले जाया गया, ले जाने वाले दो थे. मैं ने देखा कि एक शख्स हाथ में ज़मबूर लिए दूसरे का कल्ला चीर रहा था, ज़म्बूर मुंह से निकलते ही उसका कल्ला सालिम हो जाता तब वह डूसरे गलफरे को चीरता है . . .
पूछा माजरा क्या है? 
दोनों ने कहा आगे चलो. 
२- आगे मैं ने देखा कि एक चित लेटे आदमी पर दूसरा पत्थर मारता है कि सर फट जाता है, वह पत्थर उठाने जाता है कि उसका सर फिर से सलिम हो जाता है. 
मैंने माजरा जानना चाह तो कहा आगे चलो. 
३-आगे मैंने देखा कि दो मर्द और औरत नंगे एक तंदूर में जल रहे हैं. तंदूर जब उफनता है तो दोनों ऊपर तक आ जाते हैं मगर बाहर नहीं निकल पाते और फिर नीचे चले जाते हैं. मैंने माजरा जानना चाहा तो कहा आगे चलो. 
४- आगे मैंने देखा कि एक शख्स नहर में फंसा हुवा है और नहर के दोनों कनारे पर दो लोग पत्थर लिए खड़े हैं. वह एक कनारे पर निकलने को जाता है तो उस पर पहला पथराव करता है और दूसरे कनारे पर जाता है तो दूसरा उस पर पथराव कर के वापस कर देता है. मैंने उन से इसका माजरा पूछा तो वह लोग मुझे एक शानदार बाग में ले गए जिसमे एक बूढा बैठा था और बाग में एक आली शान माकन था ,फिर दूसरा माकन था, जिसमें बच्चे जवान और बूढ़े बकसरत भरे हुए है, मेरे तजस्सुस पर उन दोनों ने कहा 
१- पहला जिसका कल्ला चीरा जा रहा था वह झूटी बातों की खबर फैलता था .
२- दूसरा जिसे ज़ख़्मी किया जा रह था, वह कुरान पाकर भी उसकी तिलावत नहीं करता था.
३- जिन जोड़े को आपने तंदूर में देखा, वह दोनों ज़िना कार थे. 
४-जो शख्स नाहर में फंसा था वह सूद खोर था.
इन चरों को क़यामत तक यूं ही सज़ा जरी रहेगी.
बाग में बैठे ज़ईफ हज़रात इब्राहीम अलेहिस सलाम थे. 
मकानों में उनके जन्नती औलादें थीं और दूसरे में शहीद ए जिहाद थे.
बाद में दोनों ने बतलाया हम लोग जिब्रील और मीकाईल हैं.
उन्हों ने ऊपर अब्र पर इशारा करके बतलाया कि ऊपर आप का मकान है, 
मैने कहा तो मुझे मेरे माकन ले चलो तो उन लोगों ने कहा अभी नहीं अभी आपकी उम्र बाकी है.
यह हदीस मुहम्मद की मन गढ़ंत है. सबसे पहले इनका क़ल्ला चीरा जाना था, मगर मोहताज अवाम की इतनी हिम्मत कहाँ कि वह झूठे पैगाबर के खिलाफ लब कुशाई करते .
बल्कि इन चारो सज़ाओं के मुजरिम खुद मुहमद होते हैं. 
अपने बहू के साथ ज़िना करते, बेटे ने देख लिया था, फिर उसे बगैर निकाह के ज़िन्दगी भर रखैल बना कर रखा, जिसकी तबलीग ओलिमा उनके हक़ में करते रहे, ये उनकी मजबूरी है कि मुसलमान यही सुनना चाहते है.
इतना बड़ा ख्वाब जो दूसरे दिन इस तरह बयान किया जय? इसकी पेश बंदी बतलाती है कि यह दिन में मुहम्मद ने खुली आँखों से देखा. 
मुसलमानों! 
क्या तुम कहाँ हो, क्या तुम्हारा रहनुमा इतना झूठा हो सकता है? 

जीम. मोमिन 

Tuesday, 7 October 2014

Hadeesi hadse 15


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हदीसी हादसे 15

बुखारी६४९
मुहम्मद के चाचा अबू तालिब का जब वक़्त आखीर आया तो मुहम्मद उनको देखने गए. वहां पर उनके दूसरे चचा अबू जेहल और कुछ लोगों को मौजूद पाया. मुहम्मद ने कहा,
" चाचा! कहो ला इलाहा इल्लिल्लाह, इस कलिमे से मैं खुदा के सामने तुम्हारी गवाही दूंगा."
इस पर अबू जेहल और ईद इब्न उम्मीद ने कहा, "
"अबू तालिब क्या तुम अपने बाप अबू मुत्तलिब के दीन से मुन्हरिफ़ हो रहे हो?"
अबू तालिब ने कहा,
"मैं अपने बाप अबू मुततालिब के दीन पर क़ायम हूँ."
इस पर मुहम्मद ने कहा
"खुदा की क़सम मैं तुम्हारे लिए मग्फ़िरत की दुआ करता रहूँगा"
अबू तालिब ने मुहम्मद को पाला पोसा और तमाम उम्र मुहम्मद के सर परस्त रहे . उन्हें भी अपनी झूटी पैगम्बरी की दावत दी. 
दूसरी तरफ मुहम्मद ने अपनी उम्मत को मना किया है कि अपने काफ़िर रिश्ते दारों के लिए मग्फ़िरत की दुआ मत किया करो. हर जगह मुहम्मद दोगले साबित हुए हैं.

बुखारी६५०
मुहम्मद किसी जनाज़े में शरीक थे कि  ज़मीन पर बैठ गए, दूसरे लोग  भी  इनके गिर्द बैठ गए. लोगों ने देखा कि वह अपनी छड़ी से ज़मीन पर कुछ नक्श कर रहे थे, कहा,
"लोगो! तुम में हर फ़र्द  की हक में दोज़ख और जन्नत मुक़द्दर में लिखी हुई है."
किसी ने कहा
"अगर ऐसा ही है तो आमाल की ज़रुरत कैसी? जब पहले ही मुक़द्दर लिख दिया गया है."
कहा "जो शख्स फ़रमा बरदार है उसके किए फ़रमा बरदारी और नाफ़रमान  के लिए नाफ़रमानी के अमल आसान कर दिए गए हैं."
सवाल उठता है इस में शिकायत का अज़ाला कहाँ है? बात वहीँ पर कायम है. बहुत से लोगों को मुहम्मद के जवाब पर सवाल करने की हिम्मत न थी.  अल्लाह उनके लिए अमल आसन क्यों कर देता है? पैदा होते ही पेट से अगर फ़र्द पर दोज़ख और जन्नत लिख दी गई है तो यह इंसान के साथ अल्लाह की बे ईमानी है और हठ धर्मी है.
फ़र्द तो बे कुसूर है.

बुखारी ६५१-५२-५३
इस्लामी फार्मूला है कि बन्दों की किस्मत अल्लाह हमल में ही लिख देता है,
फिर बन्दे के आमाल क्यों दर्ज किए जाते हैं?
इस मौज़ू  पर ओलिमा तरह तरह की दलील गढ़ते हैं.
अल्लाह कहता है कि जिस तदबीर से बन्दा खुद कशी करता है उसी तरकीब से अल्लाह जहन्नम में उसको अज़ीयत पहुंचाएगा. मसलन किसी  बन्दे ने फाँसी लगा कर खुद कशी की है तो जहन्नम में उसे फँसी की अज़ीयत नाक मौत का सिलसिला चलता रहेगा वह भी हमेशा, मौत तो दोज़ख में है ही नहीं.  



जीम. मोमिन 

Monday, 29 September 2014

Hadeesi hadse 14


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हदीसी हादसे 14

बुखारी ६४२ 
हदीस है कि मय्यत को दफ़नाने के बाद जब लोगों की वापसी से जूतों की आवाज़ आएगी तो फ़रिश्ते कब्र में नाजिल होंगे, मुर्दे को उठा कर बैठा देंगे और उससे पूछेंगे कि मुहम्मद के बारे में तेरा क्या ख़याल है? वह कहेगा कि अल्लाह के बन्दे और अल्लाह के रसूल थे. फ़रिश्ते कहेंगे देख तेरा मुकाम पहले दोज़ख में था मगर अब तुझको जन्नत अता होती है. मुहम्मद कहते हैं उसको ये दोनों मुकाम दिखलाए जाएँगे. 
इनके बाद जो मुनाफ़िक़ होंगे वह कहेगे कि जैसा लोग कहते थे वैसा ही मैं भी कहता था, उन के सर पर हथौड़ा चलेगा कि जिसकी आवाज़ जिन्स और इन्सान न सुन पाएँगे बाकी सब सुनेंगे. 

बुखारी ६३९ 
मुहम्मद ने मर्ज़ ए वफात में अपनी बीवी आयशा से कहा यहूदियों और ईसाइयों पर खुदा की मार कि जिनहों ने अपने नबियों की क़ब्रों को सजदा गाह बना रख्खा है. 
आयशा ने कहा हाँ! मुझे खफ़ है कि कहीं आपकी कब्र को भी सजदागाह न बना लिया जाए. 
शायद यह बात गलत है कि मरते वक़्त इंसान के दिल में बुग्ज़ और झूट की कोई जगह नहीं रहती. यह हज़रत कुदूरत के पुतले थे. 

बुखारी ६१७-१८ 
मुहम्मद ने किसी मिटटी में औरतों को शरीक होने से महरूम कर दिया और कहा जो शख्स अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखता है, उसे चाहिए की मौतों का सदमा तीन दिन से ज़्यादः न किया करे. 

बुखारी ६३० 
मुहम्मद अपने लौंडी जने बेटे की खबर लेने चले जो युसूफ लोहार के यहाँ पल रहा था लोहार के घर उसकी भट्टी का धुवाँ भरा हुवा था और बच्चा गालिबन धुवां को बर्दाश्त नहीं कर परः था, वह बेचैन था. मुहम्मद के गोद में आकर बच्चे इब्राहीम ने दम तोड़ दिया. जिसे मुहम्मद ने अल्लाह की मर्ज़ी जाना. लोहार पर कोई इलज़ाम न दिया जिसकी वजेह से बच्चा मर गया,. 
मुहम्मद साहिबे हसियत थे, बच्चा उनकी निगरानी में पल सकता था. 

बुखारी ६15 

अब्गुल्ला बिन अबी एक मुनाफ़िक़ था जो मुहम्मद की वजेह से मदीने का हाकिम न बन सका. उसने कई बार मुसलमान होने से पहले मुहम्मद से पंगा लिया था. आयशा पर इलज़ाम लगाने का काम इसी ने किया था. दरपर्दा मुहम्मद का जानी दुश्मन था, बावजूद इस्लाम कुबूल करने के. 
मुहम्मद ने उसके मरने के बाद उसके मुंह में थूक कर
 अपनी पैगम्बरी निभाई थी या दुश्मनी, इस बात को वह खूब जानते हैं.

बुखारी ५४१
मुहम्मद के दिमाग में फितूर जगा और उसके तहत दौरान नमाज़ वह एक क़दम आगे बढे फिर वापस आकर अपनी जगह पर कायम हो गए. ज़ाहिर है उनकी इस हरकत को उनके पीछे खड़े नमाजियों ने देखा. बाद नमाज़ लोगों ने इसकी वजेह पूछी? कहने लगे नमाज़ में पहले मेरे सामने जन्नत पेश की गई , मैं आगे बढ़ा कि इस में से एक अंगूर का खूष तोड़ लूँ, अगर मैं तोड़ लेता तो क़यामत तक तुम लोग इसको खाते.
उसके बाद मुझे दोज़ख दिखलाई गई, कहा इस जैसा मंज़र मैंने कोई नहीं देखा. इसमें रहने वाली अक्सर औरतें दिखाई दीं, सवाल उट्ठा क्यों?
कहा ये नाशुकुरी ज़्यादः होती हैं लोगों ने पूछा क्या खुदा की नाशुकुरी करती हैं?
बोले -- अपने खाविंद की नाशुकुरी ज्यादः करती हैं, एहसान फरामोश होती हैं. अगर तुम इनमें से किसी के साथ एहसान करते रहो, लेकिन वह ज़रा सी बे उन्वानी की बात पर कह देती हैं हमने तुम में कोई अच्छाई नहीं देखी.

जीम. मोमिन 

Tuesday, 23 September 2014

Hadeesi hadse 13



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बुखारी 539 
हदीस है एक यहूदन ने मुहम्मद से दौरान गुफ्तुगू बार कहती कि अल्लाह कब्र के अज़ाब से बचाए, मुहम्मद इस बात से इतना मुतासिर हुए कि उनको मौसमी फल की तरह कब्र का अज़ाब मिल गया. वह बहुत दिनों तक लोगों से कब्र का अजाब गाते रहे.
मै बार बार कहता हूँ कि इस्लाम यहूदियत की भोंडी नक्ल है. 

बुखारी ५३८ 
मुहम्मद फ़रमाते हैं क़ुसूफ़ ए शम्सी (सूर्य ग्रहण) और क़ुसूफ़ ए क़मरी (चन्द्र ग्रहण अल्लाह) अल्लाह अपने बन्दों को डराने के लिए ज़ाहिर करता है, नाकि इसका तअल्लुक़ किसी के मौत ओ ज़िदगी से होता है. जब तक चाँद और सूरज पर गहन पड़े, मुसलमानों को चाहिए नमाज़ पढ़ें और सद्का दिया करें. 
*ग्रहणों की अफवाहें तकरीबन हर कौम में होती थी और हन्दुओं में खास कर. जो कौमे जगी हुई है, वह जानते है कि इनकी वजह क्या है. 

मुहम्मद कहते हैं खुदा को अपने बन्दे और बंदियों के ज़िना करने से जितनी शर्म आती है, उतनी और किसी बात पर नहीं आती. 

*ए उम्मते-मुहम्मदी ! खुदा की क़सम अगर तुमको इन बातों का इल्म होता जिन बातों का मुझको है, तो तुम हँसते कम और रोते ज्यादः. 

*मुहम्मदी अल्लाह जो अपने बन्दों और बंदियों से ज़िना कराता क्यों है, दर असल बन्दों के लिए यह काबिले शर्म बात है. कुरआन कहता है बगैर अल्लाह के हम एक पत्ता भी नहीं हिल सकता. 
इस्लाम एक चूं चूँ का मुरब्बा है जिसे खाकर कोई भी शख्स इस्लामी पागल हो सकता है.

बुख़ारी ५३७ 
मुहम्मद की हदीस में है कि रहम (गर्भ) में क्या है? ये अल्लाह के सिवा किसी को नहीं पता.
*आज हर एक को पता है कि शिकम ऐ मादरी में लड़का है कि लड़की.
जैसे यह बात गलत साबित हुई है, वैसे ही पूरा इस्लाम आज काबिले यकीन नहीं.

बुख़ारी ५३६ 
मुहम्मद शाम और यमन के लिए अपने अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह उन पर बरकत अता करे. लोगों ने एतराज़ किया कि वह तो नज्दी हैं? फिर वही दुआ की.
फिर लोगों ने एतराज़ किया कि वह तो नज्दी हैं? मुहम्मद ने कहा - - - इस मुकाम पर ज़लज़ले और फ़ितने पैदा होंगे, वहां शैतानी सींग तुलू होता है.
*फ़ितना परवर मुल्क के लिए दुवा कैसी? है न अल्लाह के मफ्रूज़ा नबी पर नशे का गलबा. कुछ भी बक सक्कते है.

बुख़ारी ४९९ 
जुमे की नमाज़ हो रही थी, मुहम्मद नमाज़ पढ़ा रहे थे. ताजिर काफ़िला आया तो नमाजियों की भीड़ नमाज़ को छोड़ कर उसकी तरफ भागी, सिर्फ बारह लोग खड़े रहे. ऐसे में मुहम्मद ने अपने अल्लाह से एक आयत उतरवाई 
"जब लोग तिजारत और लह्व लुआब की बात देखते हैं तो आपको खड़ा हुवा छोड़ कर उधर भागते हैं." 
सहबाए किरम की असलियत ये आयत बतलाती है

बुख़ारी ५२६ 
मुहम्मद ने देखा कि कुछ लोग इस्लाम की नाफ़रमानी कर रहे हैं तो उन्हें बद दुआ देते हुए कहा कि ऐ खुदावंद! इन पर कहत नाज़िल फरमा. इन पर सात साल युसूफ के सालों जैसा करदे. चुनांच सात सालों तक ऐसा कहत पड़ा कि लोग मुरदार खाने लगे, अबू सुफ्यान मुहम्मद के पास पहुंचे और कहा ऐ मुहम्मद आप अल्लाह के इताअत का हुक्म देते है और सिलह रहमी करते हैं और आपकी कौम हलाक़ हुई जाती है. आप अल्लाह से दुआ कीजिए - - - 
*ये हदीस पूरी तरह से गढ़ी हुई है. न अरब में सात साल का कहत कभी पड़ा न खुद मुहम्मद को इसका सामना करना पड़ा. इस गढ़ंत में मिस्र के सात साला कहत को नक्ल करना और दौर को इस्लाम में शामिल करना है. 
 

जीम. मोमिन 

Thursday, 11 September 2014

Hadeesi hadse 12


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हदीसी हादसे 12


बुखारी ४७४ 
रेशमी हुल्लाह (एक किस्म का लिबास) मुहम्मद के हिसाब से मुसलामानों पर हराम है. किसी ने इनको इसका तोहफः दिया जिसे उन्हों ने लेकर अपने ख़लीफ़ा उमर को भिजवा दिया.उसे वापस लेकर उमर मुहम्मद के पास आए और सवाल किया कि जब रेशमी कपडे खुद अपने पर आप हराम करार देते हैं तो मुझे किस इरादे से भिजवाया? (मुहम्मद कशमकश में पड़ गए, कोई जवाब न था.
उमर ने उस कुरते को अपने भाई को मक्का में भेज दिया को अभी तक काफ़िर था. सारे मुआमले झूठे ईमान की अलामत हैं.


बुखारी ४७५ 
मुहम्मद कहते हैं कि अगर उनको अपनी उम्मत की तकलीफ का ख़याल न होता तो वह हर नमाज़ से पहले उनसे मिस्वाक कराते . 
*रमजानों में मिस्वाक दिन भर नहीं क्यूंकि अल्लह रोज्दारों के मुंह की बदबू को पसंद करता है. 

बुखारी ४८३-४८४ 
मुहम्मद बयक वक़्त दो बातें करते है जो आपस में मुख्तलिफ होती हैं, जुमे के रोज़ मदीने के गरीब मजदूरों के जिस्म से पसीने की बदबू को सूंघ कर कहते हैं कि कम से कम आज तो नहा लिया होता. वहीँ दूसरी तरफ मदीने के मुज़ाफ़त से आने वाले नमाजियों से कहते है कि तुम्हारे गर्द आलूद कपड़ों को देख कर अल्लह तुम पर दोज़ख की आग हरम कर देगा. 
मुहम्मद को हर वक़्त बोलते रहना है चाहे बात में ताजाद ही क्यूं न हो. 

बुखारी ४९० 
बण्डल बाज़ सहाबी अनस कहता है कि मुहम्मद पहले मस्जिद के खम्बे में टेक लगा कर खुतबा दिया करते, फिर जब मिम्बर तैयार हो गया तो उसमें टेक लगा कर बोलते. 
आगे कहता है कि उस मिम्बर से ऐसी रोने की आवाज़ आती थी गोया दस महीने की गाभिन ऊंटनी की रोने की आवाज़ आती हो.

बुखारी ४९६ 
झूठा अनस कहता है एक अरबी क़हत साली के आलम में मस्जिद में मुहम्मद से बयान किया कि या रसूल अल्लाह हम लोग भयानक कहत का सामना कर रहे हैं, अल्लाह से दुवा कीजे कि पानी बरसे. 
अनस कहता है कि मदीने में मूसला धर बारिश हुई, यहाँ तक कि लोगों के बहुत से घर गिरने लगे. वह अगले जुमे को आया और अर्ज़ किया कि या रसूल अल्लाह बरसात रोकिए कि हम तबाह हो रहे है. मुहम्मद ने हाथ उठा कर दुआ की तो मदीने से बदल छत गए. 
अरब में इस क़दर बरसात आलमी तवारीख में तो नहीं हुई कि बाढ़ जैसे हालत हो जाएँ.

जीम. मोमिन